जैविक प्रमाणीकरण के चरण

  1. आवेदनः-जैविक प्रमाणीकरण हेतु एकल कृषक स्वयं या समूह के रूप में प्रमाणीकरण के लिए आन्तरिक नियन्त्रण प्रणाली या कार्य प्रदाता संस्था के द्वारा पृथक-पृथक आवेदन पत्र में प्रमाणीकरण संस्था को आवेदन कर सकते है।
  2. अनुबन्धः-आवेदन के साथ अथवा कार्य प्रदाता संस्था को प्रमाणीकरण संस्था के साथ पारस्परिक हिलों का ध्यान रखते हुए अनुबन्ध करना होता है प्रमाणी करण हेतु पंजीकरण से पूर्व एकलकृषकों/कृषक समूह से राजस्थान जैविक प्रमाणीकरण संस्था द्वारा अनुबन्ध करवाया जाता है जिसकी शर्त आवश्यकतानुसार समय-समय पर परिवर्तनीय है।
  3. प्रमाणीकरण शुल्कः-जैविका प्रमाणीकरण हेतु आवेदन व अनुबन्ध की सन्तुष्टि के बाद प्रमाणीकरण शुल्क अग्रिम राशि के रूप में जैविक प्रमाणीकरण संस्था को जमा करवाना होता है। राजस्थान जैविक प्रमाणीकरण संस्था का प्रमाणीकरण शुल्क अन्य कार्यरत प्रमाणीकरण संस्थाओं की तुलना में कम है वर्तमान में प्रमाणीकरण शुल्क संलग्न तालिका के अनुसार है।
  4. पंजीकरणः-पूर्णतःभरे हुए आवेदन पत्र व अन्य दस्तावेज जैसे अनुबन्ध, जैविक सिस्टम प्लान (जैविक क्षेत्र में मौसमवार फसलों एवं उनके उत्पादन कार्यों के विवरण सहित) एवं निर्धारित शुल्क रसीद के पश्चात इन सभी दसतावेजों की जांच की जताी है तथा आवेदनकर्ता का पंजीकरण किया जाता है। उत्पादनकर्ता अपना पंजीकरण प्रस्ताव ई-मेल या फैक्स द्वारा भी राजस्थान जैविक प्रमाणीकरण संस्था को भेज सकता है, शुल्क आवेदनकर्ता को प्रतिवर्ष पंजीकरण की वैधता व नवीनीकरण की समाप्ति से पूर्व पुनः नवीनीकरण आवेदन पत्र के साथ जमा करवाना होता है।
  5. क्षेत्र निरीक्षण (अंकेक्षण)ः-पंजीकरण सुनिश्चित होने के बाद एकल कृषक व कृषक समूह के संदर्भ में आन्तरिक नियंत्रण प्रणाली के आन्तरिक निरीक्षकों के द्वारा समूह के 100 प्रतिश जैविक कृषकों के निरीक्षण के बाद एवं उन आन्तरिक निरीक्षण प्रपत्रों की प्रतिलिपि प्रमाणीकरण संस्था में भिजवाने के पश्चात प्रमाणीकरण संस्था निरीक्षों के द्वारा कुछ चयनित कृषकों का निरीक्षण किया जाता है। एकल कृषक के पंजीकृत जैविक क्षेत्र में कृषि हेतु अपनाई जा रही समस्त क्रियाविधियां (बीज, जैविक खाद, जैव उर्वरक, जैविक कीट व रोगनाशक, बफरजाने, उपकरण, प्रसंस्करण, भण्डारण, विक्रय संबंधित दस्तावेज आदि) क्रिया विधियां एव उपलब्ध संस्थाधनों व कृषक द्वारा कृषक डायरी में किये जा रहे संधारण की जांच की जाती है। इसी प्रकार कृषक समूह के निरीक्षण के समय चयनित कृषकों के पंजीकरण क्षेत्र कृषक द्वारा मौसमवार लगाई गई फसलों का विवरण फसल उत्पादन में उउपयोग किय गए बाहरी व आन्तरिक आदानों का विवरण कृषक के पास उपलब्ध संसाधनों, कृषक डायरी की पूर्तियों, आन्तरिक नियन्त्रित प्रणाली दस्तावेजीकरण की जांच व आन्तरिक निरीक्षक का एक साक्षी निरीक्षण भी किया जाता है तथा कृषक समूह व आन्तरिक नियन्त्रण प्रणाली संस्था की कार्यप्रणाली की संक्षिप्त रिपोर्ट बाहय निरीक्षण जांच प्रपंत्रों के साथ मूल्यांकन हेतु प्रमाणीकरण संस्था के कार्याल्य में जमा करवायी जाती है।
  6. मूल्यांकनः-जैविक क्षेत्र के बाहय निरीक्षण के पश्चात प्रमाणीकरण संस्था के कार्यालय निरीक्षक द्वारा जमा करवायी गयी जांच प्रपत्रों का मूल्यांकन अधिकारी द्वारा मूल्यांकन किया जताा है तथा कृषक द्वारा अपनी गयी जैविक विधियों की अनुपालना व अवहेलना एवं उनके स्तर के संबंध में टिप्पणी तैयार की जाती है। कृषक द्वारा जैविक विधियों की अवहेलनाओं का स्तर 3 प्रकार का होता है।
    • प्रमुख वृहत् अवहेलनाएं
    • प्रमुख सूक्ष्म अवहेलनाएं
    • प्रमाणीकरण शुल्कः-जैविका प्रमाणीकरण हेतु आवेदन व अनुबन्ध की सन्तुष्टि के बाद प्रमाणीकरण शुल्क अग्रिम राशि के रूप में जैविक प्रमाणीकरण संस्था को जमा करवाना होता है। राजस्थान जैविक प्रमाणीकरण संस्था का प्रमाणीकरण शुल्क अन्य कार्यरत प्रमाणीकरण संस्थाओं की तुलना में कम है वर्तमान में प्रमाणीकरण शुल्क संलग्न तालिका के अनुसार है।
  7. अनुशंसाः-मूल्यांकन अधिकारी द्वारा तैयार रिपोर्ट का परीक्षण जैविक प्रमाणीकरण अधिकारी द्वारा किया जाता है तथा एन.जी.ओ.पी. के नियमानुसार उचित अनुशंसा निदेशक/प्रमाणीकरण समिति को भिजवायी जाती है।
  8. अवहेलना पत्र जारी करनाः-़क्षेत्र निरीक्षण के दौरान पायी गई अवहेलनाओं हेतु कृषक/आई.सी.एस. को एक अवहेलना पत्र जारी किया जाता है जिसमें दी गई अवहेलनाओें की पूर्ति प्रमाणीकरण संस्था द्वारा दी गई समयाविध में करनी होती है।
  9. अवहेलनाओं की पूर्तिः-प्रमाणीकरण संस्था द्वारा जारी अवहेलनाओं की पूर्ति के पश्चात संस्था को कृषक/आई.सी.एस.द्वारा अवहेलना पूर्ति प्रपत्र भिजवाया जाता है, जिसकी जांच व अनुपालना होने की सुनिश्चितता प्रमाणीकरण संस्था के अधकारियों द्वारा अगले बांध निरीक्षण के समय की जाती है।
  10. प्रमाणीकरण समिति की बैठकः-अवहेलना की पूर्ति की सूचना संस्था को प्राप्त होने पर प्रमाणीकरण समिति की बैठक आमंत्रित की जाती है जिसमें कृषक में पंजीकृत क्षेत्र प्रमाणीकरण स्तर का निर्णय लिया जाता है यदि अवहेलनाओं का स्तर निरन्तर वृहत की श्रेणी में आने व उनकी अनुपालना नहीं होने पर पंजीकरण निरस्त किया जा सकता है अथवा समूह प्रमाणीकरण की स्थिति में इस कृषक को समूह से निष्कासित भी किया जा सकता है या उसके रूपान्तरण वर्ष की अवधि एक वर्ष बढ़ा दी जाती है जिसकी सूचना कृषक को प्रेषित की जाती है।
  11. स्कोप प्रमाणपत्र जारी करनाः-प्रमाणीकरण समिति की बैठक में लिए गय निर्णय के अनुसार ट्रेसनेट साॅफ्टवेयर द्वारा एकल कृषक/कृषक समूह का स्कोप प्रमाण पत्र जारी किया जाता है जिसमें कृषक व उसके जैविक क्षेत्र की सम्पूर्ण जानकारी के साथ उगायी गई फसलों व जैविक क्षेत्र में प्रमाणीकरण स्तर का विवरण होता है।
  12. ट्रांजेक्शन प्रमाण पत्र जारी करनाः-एकल कृषक/कृषक समूह को जारी किये गये स्कोप प्रमाण पत्र में से किसी उत्पादन का विपणता अगर घरेलू बाजार में या निर्यात किया जाता है तो उत्पादक उत्पाद का नाम, मात्रा क्रयकर्ता का नाम, रसीद परिवहन की रसीद इत्यादि का पूण्र्या विवरण प्रमाणीकरण संस्था का टेसनेट के माध्यम से स्वयं या डाक द्वारा उपलब्ध कराकर आवेदन करेगा तो उसे ट्रांजेक्शन प्रमाण पत्र उस विक्रय सामग्री का उपलब्ध करवाया जायेगा।
  13. अपीलः-यदि किसी कारण से प्रमाणीकरण को स्वीकृति नहीं दी जाती एवं जैविक किसान संतुष्ट नहीं हो तो यह अपील कर सकता है। अपील करने हेतु निर्धारित प्रपत्र में अपील शुल्क सहित आवेदन किया जा सकता है। जैविक कृषक का आवेदन अपील कमेटी के समक्ष पूर्ण दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत किया जाता है। अपील कमेंटी के निर्णयानुसार कार्यवाही की जाती है तथा आवेदनकर्ता का यथानुसार निर्णय की जानकारी दी जाती है।